Friday, 29 May 2015

कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

मै यादों का
       किस्सा खोलूँ तो,
         कुछ दोस्त बहुत
        याद आते हैं.

      मै गुजरे पल को सोचूँ       
      तो,  कुछ दोस्त
      बहुत याद आते हैं.
 
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
         कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.
  
कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
 
सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी

किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही

कोई पढने में डूबा है
किसी की दो दो महबूबा हैं

सारे यार गुम हो गये हैं
तू से आप और तुम हो गये है

      मै गुजरे पल को सोचूँ       
      तो,  कुछ दोस्त
      बहुत याद आते हैं.

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