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बुधवार, 28 जनवरी 2026

प्रेम रस इक्किसी

।। प्रेम रस इक्किसी हरी सार प्रभात ।।

अवल आसरो ऐक है,कवल सखावण काज ।नकल हर नित निहारिये ,सकल सार सिरताज ।(१)

परम रहे नित पनपतो ,निज शर्म रखण नेह।धर्म चुकां धिन हटसी ,कर्म सुधार करेह (२)

मनवा नर हरि माणलै ,परवर प्रेम परिवार।जर जर कर मत जीवनी ,सरवर अम्ब संसार ।(३)

तर तर तो गत तमस से ,वर हर सर विश्वास ।सुर पुर साधण सायबी ,तड़ फड़ मत तूं त्रास ।(४)

कुलखण छोडण कवल कर ,विलसण हर विश्वास ।अनुसरण तूं आत्मा  ,परसण श्री मन पास ।(५)

कर्म श्रम करुणा करो ,धर्म शरण धजवाय ।मर्म ओळखण रै मनां ,चर्म सुख मत चळकाय ।(६)

खर गत को तु खदेड दे ,जर जड़ जीव जंजाळ।हर सुर हरखण हथ करो ,कर छड दिय तुं काळ ।(७)

नाळ प्रेम हरि नीसरो ,पाळ श्री  पहुंचाण ।काळ उजाळण काम को ,निरताळ सख निसाण ।(८)

चोट करे नह चिळकणो ,खोट मनां खंखाळ ।परमार्थ रथ पनपतो ,पुनः री बांधो पाळ।(९)

जीव दया तुं जाचलै ,दिलां उतारण दंभ ।तामस कर किम ताड तो ,खड़ो किम अड़ी खंभ ।(१०)

भूल काळ की भाळ लै ,कौरव रावण कंस ।दानवता मन ढह गया ,उजाड़ अपणो अंस ।(११)

समझ समझ तूं साच नां ,अण समझ मत उजाड़।अवस मरणो ज ऐक दिन ,वर मत विरध विगाड़ ।(१२)

चाड़ न चंडाळ चोकड़ो ,ठग रा  घोड़ा ठांभ ।तामस भर नह ताडणो ,खोटा लखसण खांभ ।(१३)

राम गुणां में राज तूं ,मरियादा महमाण ।आदर कर ले असल रो ,जीवन गत को जाण ।(१४)

आंबा जग जाळ अबखो ,लांबा हथ लोहार ।झूबां हरी री झल तूं ,वीठल वाट बुहार ।(१५)

गुरु ज्ञान को गोत लै ,शुरु सवेली सोच ।अरि भाळक्यां अटकसी ,मिरु  काढ एह मोच ।(१६)

सिणगार कर तुं श्री तणो ,सोही लेसी सार ।साख परख तुं सायब की ,तो है तारण तार ।(१७)

वसुओं रख व्यवहार को ,पढ परमार्थ पाठ ।गौ पाळण श्री गंजसी ,ठावा ठाकर ठाठ ।(१८)

वाट वीठल कर वसवीं ,गौ पूजा गुणगान ।गिरधर तहां हि गंजतो ,धर गौ रिक्षा ध्यान ।(१)

निरख उथिये नारायणी ,जन्मी गौ सुख गांम ।आयल विरवड़ आवड़ा ,नवधा करणी नाम ।(२०)

सूरा सुर हरी साखिया ,असल इक्कीसी अम्ब ।अवस ईश्वर औळखौ ,जीव दया जगथम्ब ।(२१)

आम्बदान जवाहरदान देवल आलमसर 

रविवार, 11 जनवरी 2026

उर्दू लेखक और व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद युसूफी

पाकिस्तानी उर्दू लेखक और व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद युसूफी का 20 जून2020 को इंतकाल हो गया।
 व्यंग्य के गालिब माने जाते थे।
          

1. "इस्लाम के लिए सबसे ज़्यादा कुर्बानी *बकरों* ने दी है"...

2. "मर्द की आँख और औरत की ज़ुबां का *दम* सब से आख़िर में निकलता है"...

3. "ईस्लामिक वर्ल्ड में आज तक कोई बकरा *कुदरती मौत* नहीं मरा..."

4. "दुश्मनी के लिहाज़ से दुश्मनों के तीन दर्जे होते है - दुश्मन, जानी दुश्मन और *रिश्तेदार*...

5. "आदमी एक बार प्रोफ़ेसर हो जाए तो ज़िन्दगीभर *प्रोफेसर* ही रहता है, चाहें बाद में वह समझदारी की बातें ही क्यों न करने लगे..."

6. "उस शहर की गलियां इतनी तंग थीं, कि गर मुख्तलिफ जीन्स (opposite sex) आमने सामने हो जायें, तो *निकाह* के अलावा कोई गुंजाईश नहीं रहती..."

7. "वो ज़हर दे के मारती तो दुनिया की नज़र में आ जाती, अंदाज़-ए-क़त्ल तो देखो - हमसे *शादी* कर ली..."

8. "दुनिया में *ग़ालिब* वो अकेला शायर है जो समझ में ना आये तो दुगना मज़ा देता है..."

9. "कुछ लोग इतने मज़हबी होते है कि *जूता* पसंद करने के लिए भी मस्ज़िद का रुख़ करते हैं..."

10. "मेरा ताल्लुक उस भोली भाली नस्ल से ह जो ये समझती है कि बच्चे बुज़ुर्गों की *दुआओं* से पैदा होते हैं..." 

11. "हमारे ज़माने में *तरबूज़* इस तरह खरीदा जाता था जैसे आज कल शादी होती है - सिर्फ सूरत देखकर..."

12. "सिर्फ 99 प्रतिशत पुलिस वालों की वजह से बाकी *1 प्रतिशत* भी बदनाम हैं..."

13. " *हुकूमतों* के अलावा कोई भी अपनी मौजूदा तरक्कीसे खुश नहीं होता..."

14. *फूल* जो कुछ ज़मीं से लेते है, उससे कहीं ज़्यादा लौटा देते हैं..."

15. "हमारे मुल्क की अफवाहों की सब से बड़ी खराबी ये है कि वो *सच* निकलती हैं..."

16. मुसलमान किसी ऐसे जानवर को मुहब्बत से नहीं पालते जिसे *जिबह* करके खा न सकें।

17. बुढ़ापे की शादी और बैंक की चौकीदारी में जरा भी फर्क नहीं, सोते में भी एक *आंख खुली* रखनी पड़ती है।

18. मुहब्बत अंधी होती है, लिहाजा औरत के लिए खूबसूरत होना जरूरी नहीं, बस मर्द का *नाबीना (अंधा)* होना काफी होता है।

19. लफ्जों की जंग में फतह किसी भी फिरके की हो, *शहीद* हमेशा सच्चाई होती है।

20. जो देश जितना गरीब होगा, उतना ही *आलू और मजहब* का चलन ज्यादा होगा।