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रविवार, 11 जनवरी 2026

उर्दू लेखक और व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद युसूफी

पाकिस्तानी उर्दू लेखक और व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद युसूफी का 20 जून2020 को इंतकाल हो गया।
 व्यंग्य के गालिब माने जाते थे।
          

1. "इस्लाम के लिए सबसे ज़्यादा कुर्बानी *बकरों* ने दी है"...

2. "मर्द की आँख और औरत की ज़ुबां का *दम* सब से आख़िर में निकलता है"...

3. "ईस्लामिक वर्ल्ड में आज तक कोई बकरा *कुदरती मौत* नहीं मरा..."

4. "दुश्मनी के लिहाज़ से दुश्मनों के तीन दर्जे होते है - दुश्मन, जानी दुश्मन और *रिश्तेदार*...

5. "आदमी एक बार प्रोफ़ेसर हो जाए तो ज़िन्दगीभर *प्रोफेसर* ही रहता है, चाहें बाद में वह समझदारी की बातें ही क्यों न करने लगे..."

6. "उस शहर की गलियां इतनी तंग थीं, कि गर मुख्तलिफ जीन्स (opposite sex) आमने सामने हो जायें, तो *निकाह* के अलावा कोई गुंजाईश नहीं रहती..."

7. "वो ज़हर दे के मारती तो दुनिया की नज़र में आ जाती, अंदाज़-ए-क़त्ल तो देखो - हमसे *शादी* कर ली..."

8. "दुनिया में *ग़ालिब* वो अकेला शायर है जो समझ में ना आये तो दुगना मज़ा देता है..."

9. "कुछ लोग इतने मज़हबी होते है कि *जूता* पसंद करने के लिए भी मस्ज़िद का रुख़ करते हैं..."

10. "मेरा ताल्लुक उस भोली भाली नस्ल से ह जो ये समझती है कि बच्चे बुज़ुर्गों की *दुआओं* से पैदा होते हैं..." 

11. "हमारे ज़माने में *तरबूज़* इस तरह खरीदा जाता था जैसे आज कल शादी होती है - सिर्फ सूरत देखकर..."

12. "सिर्फ 99 प्रतिशत पुलिस वालों की वजह से बाकी *1 प्रतिशत* भी बदनाम हैं..."

13. " *हुकूमतों* के अलावा कोई भी अपनी मौजूदा तरक्कीसे खुश नहीं होता..."

14. *फूल* जो कुछ ज़मीं से लेते है, उससे कहीं ज़्यादा लौटा देते हैं..."

15. "हमारे मुल्क की अफवाहों की सब से बड़ी खराबी ये है कि वो *सच* निकलती हैं..."

16. मुसलमान किसी ऐसे जानवर को मुहब्बत से नहीं पालते जिसे *जिबह* करके खा न सकें।

17. बुढ़ापे की शादी और बैंक की चौकीदारी में जरा भी फर्क नहीं, सोते में भी एक *आंख खुली* रखनी पड़ती है।

18. मुहब्बत अंधी होती है, लिहाजा औरत के लिए खूबसूरत होना जरूरी नहीं, बस मर्द का *नाबीना (अंधा)* होना काफी होता है।

19. लफ्जों की जंग में फतह किसी भी फिरके की हो, *शहीद* हमेशा सच्चाई होती है।

20. जो देश जितना गरीब होगा, उतना ही *आलू और मजहब* का चलन ज्यादा होगा।